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Updated: 19 अक्टूबर, 2016 08:31 PM
सुजीत कुमार झा
सुजीत कुमार झा
  @suj.jha
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बिहार के कई हिस्सो में दशहरा और मुहर्रम के दौरान फैले सांप्रदायिक दंगो की वजह सोशल मीडिया है या फिर प्रशासन की लापरवाही यह तो जांच का विषय है लेकिन मधेपुरा के जिलाधिकारी इस चक्कर में अपने ही आदेश में उलझ कर रह गए. मधेपुरा जिला के बिहारीगंज में दशहरा और मुहर्रम के बाद फैले सांप्रदायिक तनाव के लिए उन्होंने सोशल मिडिया को ही पूरी तरह से जिम्मेदार ठहरा दिया. और एक तुगलकी फरमान भी जारी कर दिया. लेकिन जब सोशल मिडिया पर ही इस आदेश की आलोचना होने लगी तब जिलाधिकारी साहब को अपने ही आदेश को संशोधित करना पडा.

मधेपुरा के जिलाधिकारी मोहम्मद सोहैल ने एक आदेश जारी कर कहा कि जिले में जितने भी वाट्सएप और फेसबुक ग्रुप है उन सभी में जिला प्रशासन द्वारा जारी मोबाईल नम्बर 9955948775 को शामिल किया जाये. इससे प्रशासन उक्त ग्रुप पर अपनी निगरानी रख सकेगा. जिलाधिकारी महोदय का कहना है ही हाल में हुए बिहारीगंज में साम्प्रदायिक तनाव सोशल मीडिया की वजह से हुआ है. उनका कहना है कि अफवाह फैलाने में सोशल मीडिया ने अहम भूमिका निभाई. ऐसा वो इसलिए कह रहे हैं क्योंकि जिन मोबाइल नम्बरो की जांच की गई उसमें पाया गया कि कुछ ग्रुप के जरिए अफवाह फैलाने का काम किया गया.

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इसलिए उन्होंने फरमान जारी कर दिया कि जितने भी वाट्सएप ग्रुप या फेसबुक ग्रुप हैं उनके निगरानी के लिए एक सेल बनाया जाए. इसमें शामिल अधिकारियों को ये सख्त निर्देश जारी किया गया है कि वो सभी प्रकार के सोशल मीडिया ग्रुप पर बारीक नजर रखेंगे और उसमें दी जा रही सूचना को भी सूचीबद्ध करेंगे. सभी ग्रुप के एडमिन को निर्देश दिया गया है कि वो 9955948775 को अनिवार्य रूप से अपने ग्रुप में शामिल करें. यहां तक कि फेसबुक में मधेपुरा मोनिटर को फ्रेंड रिक्वेस्ट भी भेजना है. और ऐसा नही करने पर आईपीसी और आईटी एक्ट के तहत कार्रवाई की जायेगी और  मुकदमा दर्ज होगा. कानूनी कार्रवाई उन पर भी होगी जो ग्रुप में गलत सूचना देंगे. यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया.

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 ऐसी निगरानी तो बस अधिकारों का हनन है!

जिलाधिकारी के इस फरमान के बाद खलबली मच गई. और सोशल मीडिया पर ही उनकी आलोचना शुरू हो गई. सबसे पहले सवाल तो यही था कि पारिवारिक ग्रुप में प्रशासनिक नम्बर को कैसे शामिल कर सकते हैं. यह मौलिक अधिकार का हनन है इत्यादी तमाम बातें सोशल मीडिया पर आनी शुरू हो गई.

आलोचना से दबाव महसूस कर जिलाधिकारी ने अपने ही आदेश में संशोधन कर दिया. कहा कि इस आदेश में परिवारिक और प्रेस से जुडे ग्रुप शामिल नही रहेंगे. अपने आदेश को स्पष्ट करते हुए कहा कि इस परिधि में मात्र वैसे ग्रुप आते है जो सोशल ग्रुप के अधीन परिभाषित किए जायेंगे. परिवारिक ग्रुप या प्रेस ग्रुप इस परिधि के अधीन नही माने जायेंगे. इस प्रकार का प्रावधान भारतीय संविधान के अनुच्छेद-19(2) एवं अच्छेद 19(3) के अधीन भारत की एकता एवं अखंडता, राज्य की सुरक्षा एवं पब्लिक ऑर्डर को बनाये रखने के उद्देश्य से किया गया है.

मधेपुरा के जिलाधिकारी द्वारा जारी आदेश को सही ठहराते हुए जेडीयू के प्रवक्ता नीरज कुमार का कहना है कि सांप्रदायिक तनाव पैदा होने की स्थिति में प्रशासन द्वारा उठाया गया यह कदम सराहनीय है. उन्होंने कहा कि जब वाट्सएप पर ग्रुप चलाने वाले गलत नहीं है तो फिर इस आदेश पर आपत्ति क्यों है? उन्होंने कहा कि कश्मीर में जिस तरह के हालात हैं उसे देखते हुए वहां भी सोशल मीडिया और इंटरनेट पर बैन लगाया गया है.

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वहीं दूसरी ओर बिहार बीजेपी के एक शिष्टमंडल ने मंगलवार को राज्यपाल से मुलाकात की और बिहार के विभिन्न इलाकों में सांप्रदायिक तनाव के लिए पूरी तरह से प्रशासनिक अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया. बीजेपी नेताओं ने राज्यपाल से मांग की है कि वो अपनी निगरानी में जांच कमेटी का गठन करें. केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी कहा है कि सोशल मीडिया एक अभिव्यक्ति का प्लैटफार्म है. मधेपुरा हो या किशनगंज, प्रशाषन का यह तुगलकी है.

सवाल यही उठता है कि आखिर बिहार के कई हिस्सों में पिछले दिनों क्यों तनाव हुआ? क्या इसके लिए केवल सोशल मीडिया ही जिम्मेदार है या फिर यह प्रशाषनिक लापवाही है? आखिर ऐसे हालात क्यों पैदा हुए? हालांकि तनाव के बाद कई हिस्सों में पांच दिनों तक इंटरनेट बंद रहा इसके बावजूद स्थिति को सामान्य होने में क्यों वक्त लगा? सवाल यह भी है कि क्या सोशल मीडिया का मतलब केवल वाट्सएप और फेसबुक ही है?

लेखक

सुजीत कुमार झा सुजीत कुमार झा @suj.jha

लेखक आजतक में पत्रकार हैं

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