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Updated: 23 नवम्बर, 2016 02:53 PM
संतोष चौबे
संतोष चौबे
  @SantoshChaubeyy
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ये सही है कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख राहिल शरीफ, जो अपने तीन साल के कार्यकाल के बाद 29 नवम्बर को रिटायर हो रहे हैं, ने कभी भी एक्सटेंशन की मांग नहीं की है बल्कि जनवरी में तो उन्होंने ये भी कहा था कि वो एक्सटेंशन नहीं लेंगे. उन्होंने तो अपना फेयरवेल टूर शुरू भी कर दिया है. लेकिन उन्होंने ये भी कभी नहीं कहा है कि एक्सटेंशन मिलने पर वो इसे रिजेक्ट कर देंगे.

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29 नवम्बर को रिटायर हो रहे हैं राहिल शरीफ

अब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ को इसपर अंतिम फैसला लेना है और उनके पास कुछ नाम और 28 नवम्बर तक का समय है. सो अगर ऐसा हो कि नवाज़ शरीफ ही घोषणा कर दें कि वो राहिल शरीफ को एक्सटेंशन दे रहे हैं तो राहिल शरीफ को इसमें कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए. ये सही है कि नवाज़ शरीफ और राहिल शरीफ के रिश्ते अच्छे नहीं हैं, नवाज़ शरीफ दूध के जले भी हैं. परवेज़ मुशर्रफ, सेना-प्रमुख जिन्हें नवाज़ ने एक्सटेंशन दिया था, नवाज़ शरीफ का तख्ता पलट कर खुद राष्ट्रपति बन गए थे. लेकिन सभी जानते हैं कि पाकिस्तान में सेना और सेना-प्रमुख ही सर्वोच्च होता है और नवाज़ राहिल शरीफ के खिलाफ जाएंगे ये सोचना भी मूर्खता है.

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और आखिर में राहिल शरीफ को इंडिया से इंतकाम भी तो लेना है. राहिल शरीफ की इंडिया से दुश्मनी जगजाहिर है. अब पाकिस्तान का वो सेना-प्रमुख जो देश में हीरो जैसा माना जाता है और पाकिस्तान के दूसरे सबसे महत्वपूर्ण शरीफ, नवाज़ शरीफ, से बहुत ज्यादा पॉपुलर हैं, वो भारत के सर्जिकल स्ट्राइक का दर्द लेकर जायेगा तो ये उसे जीवन भर सालता रहेगा जैसा की पाकिस्तानी कमांडर नियाज़ी के साथ हुआ जिन्होंने पाकिस्तान की तरफ से भारत के सम्मुख 1971 के युद्ध में समर्पण किया था.

सो राहिल शरीफ जरूर चाहेंगे के उन्हें और समय मिले और अगर शरीफ उन्हें न्योता देते हैं या पाकिस्तान का सुप्रीम कोर्ट ये कह देता है के राहिल शरीफ को उनका गौरवपूर्ण इतिहास देखते हुए और (एंटी-इंडिया स्टैंड देखते हुए) एक्सटेंशन दे ही दिया जाए या उन्हें एलिवेट कर के फील्ड-मार्शल बना दिया जाए तो राहिल शरीफ का ईगो भी सेटिसफाई हो जायेगा और उन्हें मौका भी मिल जायेगा इंडिया के खिलाफ कुछ और साजिशें रचने का.

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 एक्सटेंशन की मां नहीं की है लेकिन ये भी नहीं कहा कि एक्सटेंशन स्वीकार नहीं करेंगे

पाकिस्तानी सेना अपनी एंटी-इंडिया फ्रस्ट्रेशन कैसे निकालती है इसका पता इसी बात से चलता है कि सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से अचानक पाकिस्तान द्वारा सीजफायर वायलेशन की घटनाओं की बाढ़ सी आ गयी है. 29 सितंबर के सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से अब तक पाकिस्तान 300 से भी ज्यादा बार सीज़फायर तोड़ चुका है जिसमें हमारे 15 जवान शहीद हो चुके हैं जबकि दो मौकों पर पाकिस्तान की गोलीबारी की आड़ में आतंकवादियों ने हमारे शहीदों के शव का अपमान भी किया है जैसा कि माछल में हुआ.

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लेकिन जितने बड़े स्केल पर इंडिया ने सर्जिकल स्ट्राइक की थी, पाक-अधिकृत-कश्मीर में कई किलोमीटर अंदर जाकर दर्जनों आतंकवादियों और उनकी मदद करने वाले पाक सैनिकों को मार गिराया था और कई टेरर लॉन्चपैड तबाह कर दिए थे. राहिल शरीफ को उसका दर्द रात में जगा जाता होगा और वो छटपटा कर रह जाते होंगे. ये छटपटाहट और हड़बड़ाहट ही थी जिसने पाकिस्तानी सेना इंडिया के सर्जिकल स्ट्राइक को झूठा बताने के लिए मजबूर किया. ये इंडिया की सीधी जवाबी कार्रवाई थी जो उसने उरी आर्मी बेस-कैंप पर हुए कायराना हमले का बदला लेने के लिए की थी जिसमें हमारे 19 जवान शहीद हो गए थे.

अब राहिल शरीफ को या तो मौका नहीं मिला या हिम्मत नहीं पड़ी कि इंडिया के सर्जिकल स्ट्राइक का जवाब उसी भाषा में दिया जा सके. सो सीमापार गोलीबारी, भारतीय सैनिकों पर आतंकी हमले और उनके शवों का अपमान और निर्दोष भारतीय नागरिकों की हत्या ही सही. शवों को क्षत-विक्षत करना इसी विकृत मानसिकता का प्रतीक है. हो सकता है इन सबसे दबाव बनाकर राहिल शरीफ एक्सटेंशन पाने में सफल भी हो जाएं लेकिन फिर वो इंडिया से ज्यादा बड़ा सिरदर्द नवाज़ शरीफ के लिए साबित होंगे क्योंकि अपनी पूरी कोशिशों के बाद भी इंडिया पर सर्जिकल स्ट्राइक तो वो कर नहीं पाएंगे लेकिन नवाज़ शरीफ का तख्ता जरूर पलट देंगे.

लेखक

संतोष चौबे संतोष चौबे @santoshchaubeyy

लेखक इंडिया टुडे टीवी में पत्रकार हैं।

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