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Updated: 17 दिसम्बर, 2016 05:28 PM
आलोक रंजन
आलोक रंजन
  @alok.ranjan.92754
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ये तो हर कोई जानते है कि पिछले कुछ दिनों से कांग्रेस और समाजवादी पार्टी में संभावित गठबंधन के लिए बातचीत चल रही है. पहले तो केवल कांग्रेस पार्टी के भीतर से ही मांग उठती रही है की प्रियंका गांधी सक्रिय राजनीति में आएं, लेकिन अब ये संकेत समाजवादी पार्टी के नेताओं द्वारा भी दिया जाने लगा है. कांग्रेस और समाजवादी दोनों ही पार्टियों के नेताओं का मानना है कि उत्तर प्रदेश चुनाव में उनकी सक्रियता से दोनों को ही फायदा हो सकता है.

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 तुरुप का पत्ता साबित हो सकती हैं प्रियंका गांधी

यूपी में विधानसभा चुनाव अगले साल होना है. कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच गठबंधन की बातचीत चल रही है. समाजवादी पार्टी ये जानती है कि अगर गठबंधन बन जाता है तो बीजेपी और बसपा को हराने में प्रियंका गांधी तुरुप का पत्ता साबित हो सकती हैं, क्योंकि वे चुनाव में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं. 

कांग्रेस में कोई ऐसा चमत्कारी नेता बचा नहीं है जो कांग्रेस को अकेले दम पर उत्तर प्रदेश में विजय दिलवा सके. किसी से छुपा नहीं है कि उत्तर प्रदेश में करीब 25 साल तक राज करने वाली कांग्रेस पार्टी जहां 2012 विधान सभा चुनाव में केवल 28 सीट जीत पाई थी वहीं 2014 लोक सभा चुनाव में उत्तर प्रदेश से 2 ही सीट जीत पाई थी. वो भी इसलिए क्योंकि खुद राहुल गांधी और सोनिया गांधी, अमेठी और रायबरेली से चुनाव लड़े थे और ये गांधी परिवार का गढ़ माना जाता है. 

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न केवल कांग्रेस पार्टी बल्कि समाजवादी पार्टी भी ये जानती है की अगर गठबंधन सफल हो जाता है और अगर प्रियंका चुनाव में मुख्य भूमिका निभाती हैं तो दोनों ही पार्टियों की सीटों में इजाफा हो सकता है. फिलहाल गठबंधन को लेकर बातचीत चल रही है, कौन कितना सीट पर लड़ेगा इस पर माथापच्ची चल रही है, कांग्रेस जहां एक और 100-110 सीट की मांग कर रही वहीं दूसरी ओर समाजवादी पार्टी 70-75 सीट देने पर अड़ी है. अब नतीजा क्या निकलता है ये तो कुछ दिनों में पता चल ही जायेगा परंतु इतना तो साफ है कि अगर प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश चुनाव में उतरती हैं तो विपक्षियों के लिए मुश्किल कई गुना बढ़ जाएगी. 

कांग्रेस काफी लंबे समय से राज्‍य में सत्‍ता पाने के लिए संघर्ष कर रही है. पिछले लोकसभा चुनाव में प्रियंका ने अमे‍ठी और राय बरेली में ही केवल चुनाव प्रचार किया था. यहां से राहुल और सोनिया गांधी मैदान में थे. कांग्रेस के भीतर प्रियंका को लेकर मांग पहले भी उठती रही है. इस साल मई में प्रियंका ने पार्टी के ब्लॉक अध्यक्षों से बैठक की थी और उस समय भी प्रियंका को चुनावी मैदान में उतारने को लेकर मांग की गई थी. उस समय प्रशांत किशोर ने भी माना था की कांग्रेस का रिवाइवल प्रियंका गांधी के नेतृत्व में ही हो सकता है और उत्तर प्रदेश में जीत की सीढ़ी वही साबित हो सकती हैं. उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष राज बब्बर भी ये कह चुके हैं कि प्रियंका गांधी अगर उपस्थित रहती हैं तो वो पार्टी का उत्साह बढ़ा सकती हैं, एक नयी ऊर्जा का प्रवाह पार्टी के लोगों के बीच कर सकती हैं. 

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प्रियंका गांधी 1999 लोक सभा चुनाव में पहली बार रायबरेली में सतीश शर्मा के लिए प्रचार किया था, जिसके कारण वो विजयी साबित हुए थे. उसी साल उन्होंने सोनिया गांधी के लिए भी अमेठी से चुनाव प्रचार किया था. उसके बाद तकरीबन हर लोक सभा चुनाव में वो रायबरेली और अमेठी में प्रचार करती रही हैं. 

प्रियंका गांधी में लोगों को इंदिरा गांधी की छवि दिखती है. समीक्षकों का भी मानना है कि उनका कनेक्ट आम लोगों से ज्यादा हो सकता है, जिस तरह इंदिरा गांधी का था. वो युवाओं को लुभाने में भी एक अहम् भूमिका निभा सकती हैं. प्रियंका के पास भी अपनी दादी की तरह खूबसूरत व्यक्तित्व है. समीक्षक उनके अंदर निर्णय लेने की क्षमता देखते हैं साथ ही साथ उन्हें समझधार भी मानते हैं. उनकी अपनी व्यक्तिगत छवि हालांकि साफ है परंतु रोबर्ट वाड्रा की पत्नी होना उनके इतर जा सकता है.

लेखक

आलोक रंजन आलोक रंजन @alok.ranjan.92754

लेखक आज तक में सीनियर प्रोड्यूसर हैं.

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