सियासत

 |  5-मिनट में पढ़ें  |   08-01-2017
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चुनाव आचार संहिता (आदर्श आचार संहिता/आचार संहिता) का मतलब है चुनाव आयोग के वो निर्देश जिनका पालन चुनाव खत्म होने तक हर पार्टी और उसके उम्मीदवार को करना होता है. अगर कोई उम्मीदवार इन नियमों का पालन नहीं करता तो चुनाव आयोग उसके ख़िलाफ़ कार्रवाई कर सकता है, उसे चुनाव लड़ने से रोका जा सकता है, उम्मीदवार के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज हो सकती है और दोषी पाए जाने पर उसे जेल भी जाना पड़ सकता है.

भारत के निर्वाचन आयोग ने इस बार नए सख्त नियमों में किसी को नहीं बख्शने का स्पष्ट इशारा दे दिया है और आयकर विभाग के साथ मिलकर उसने चुनाव में काले धन पर बहुत हद तक नकेल कसने के संकेत भी दे दिए हैं.

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यूपी, उत्तराखंड, गोवा, पंजाब और मणिपुर सहित पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की तारीखों का एलान कर दिया गया है. तारीखों के एलान के साथ ही इन पांच राज्यों में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है गत बुधवार को 5 राज्यों में चुनाव की तारीखों के एलान के साथ ही वहां चुनाव आचार संहिता भी लागू हो गई, साथ ही मुख्यमंत्री या मंत्री या केंद्र सर्कार अब न तो कोई घोषणा कर सकेंगे, न शिलान्यास, लोकार्पण या भूमिपूजन. सरकारी खर्च से ऐसा आयोजन नहीं होगा, जिससे किसी भी दल विशेष को लाभ पहुंचता हो. राजनीतिक दलों के आचरण और क्रियाकलापों पर नजर रखने की प्रक्रिया शुरू हो गई है.

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 सपा विधायक लगातार आचार संहिता का उलंघन कर रहे हैं.

क्या-क्या तैयारी की गई है..

जिन 5 प्रदेशों में चुनाव होने जा रहे हैं वहां सियासी दलों और आम जनता के बैंक खातों पर भी नजर रखी जा रही है. आयोग ने पूरे राज्य की कानून व्यवस्था अपने हाथ में ले ली है. उधर, सुप्रीम कोर्ट भी जल्द चाहता है कि किस चरण तक आपराधिक मामलों के मुकदमे में शामिल व्यक्ति को चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए.

क्या है नियम?

उन तमाम 5 राज्यों में जहाँ विधानसभा चुनाव तए हुए हैं वहां काले धन का प्रयोग न हो, इसके लिए आयकर विभाग अलर्ट हो गया है. आचार संहिता लगे रहने के दौरान अगर कहीं पर आयकर विभाग की टीम को 50,000 रुपए से ज्यादा का अनअकाउंटेड कैश मिलता है, तो उसे सीज कर दिया जाएगा. कोई व्यक्ति इससे ज्यादा की रकम लेकर चले, तो उसके पास इसका ब्योरा होना चाहिए. आयकर विभाग की टीम ने बैंकों को भी ज्यादा कैश निकालने वालों पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं.

सरकार, मंत्री या अधिकारी चुनाव के ऐलान के बाद अपने मंज़ूर किए गए धन या अनुदान के अलावा अपने विवेक से कोई नया आदेश नहीं दे सकते यानी सीधे शब्दों में कहें कोई नई योजना शुरू नहीं कर सकते. प्रत्याशी और राजनीतिक पार्टी को रैली, जुलूस निकालने, मीटिंग करने के लिए इजाजत लेनी होगी और इसकी जानकारी पुलिस को देनी होगी. अगर इलाके में कोई पाबंदी लागू है तो इससे छूट पाने के लिए पुलिस से अनुमति ले. लाउडस्पीकर के इस्तेमाल के नियमों का पालन करना होगा.

कोई राजनीतिक दल या प्रत्याशी ऐसा कोई काम नहीं करेगा जिससे अलग-अलग समुदायों के बीच मतभेद को बढ़ावा मिले. वोट पाने के लिए किसी भी स्थिति में जाति या धर्म आधारित अपील भी नहीं की जा सकती. किसी भी धार्मिक स्थल मंदिर, मस्जिद, चर्च या दूसरे धार्मिक स्थल का इस्तेमाल चुनाव प्रचार के मंच के तौर पर नहीं किया जा सकता है. वोटरों को रिश्वत देकर, या डरा, धमकाकर वोट नहीं मांग सकते.

यूपी तो भईया यूपी है..

इसके वाबजूद भी उत्तर प्रदेश में लगातार इस अचार संहिता की धज्जिया उड़ती नजर आ रही हैं, चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही आचार संहिता भी लागू कर दी गई लेकिन कुछ लोगों पर इसका असर नहीं दिख रहा है. खबरों के मुताबिक शनिवार सुबह अखिलेश ने खास और लम्भुआ से सपा विधायक संतोष पांडेय ने आचार संहिता की धज्जियां उड़ाईं.

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 सभी पार्टियों को आचार संहिता का पालन करना होगा

शाहजहांपुर में एक राशन वितरण कोटे की दुकान पर अखिलेश यादव की फोटो लगे राशन कार्ड से वितरण किया जा रहा है. जबकि चुनाव आचार संहिता को लगे आज चार दिन बीत चुके हैं. उसके बावजूद प्रशासन का ध्यान इस ओर नहीं गया है.

इलाहाबाद से सपा के कैंडिडेट (अखिलेश ग्रुप) संदीप यादव बुधवार शाम जुलूस निकाला. इसपर जिला निर्वाचन अधिकारी ने उनकी गाड़ियों को सीज कर दिया गया है. करीब 6 बजे के आसपास जनसभा को संबोधित किया. करीब 40 गाड़ियों और 30-40 की संख्या में बाइक के काफिले के साथ जुलूस निकाला गया. इसके चलते लोगों को घंटो जाम का सामना करना पड़ा.

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मलिहाबाद के विधायक और यहीं से अखिलेश गुट के उम्मीदवार इंदल रावत को आचार संहिता उल्लंघन का नोटिस जारी किया गया है. इंदल रावत बुधवार को खुली जिस्पी से प्रचार करने निकले थे. इस गाड़ी पर दो हूटर भी लगे थे जबकि आचार संहिता के अनुसार हूटर नहीं लगाए जा सकते.

मुरादनगर से बीएसपी प्रत्याशी सुधन रावत की गाड़ी पर पार्टी का झंडा और बैनर देख पुलिस ने रोककर चेकिंग की तो उसमें प्रचार सामग्री भी बरामद हुई. जिसके बाद गाड़ी को सीज कर दिया गया.

देवरिया जनपद में शहर से लेकर गांव तक प्रत्याशियों के बैनर, होर्डिंग्स और पोस्टर से पटे पड़े हैं. इसमें सबसे बड़ी बात यह है कि अधिकारियों के नाक के नीचे शहर के सुभाष चौक से लेकर पूर्वा चौराहे तक राजनीतिक पार्टियों के प्रचार सामग्रियों से भरे हुए हैं.

शुक्रवार को समाजवादी पार्टी के नेता चन्दन सिंह चौहान पर अचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगा, जिन्होंने बिना अनुमती पब्लिक मीटिंग की. बसपा प्रत्याशी मोहम्मद इस्लाम पर भी मॉडल कोड ऑफ़ कन्डक्ट की खिलाफत का आरोप लगा. शिकारपुर में रोड शो करने पर बुलंदशहर बसपा विधायक भी बिना अनुमति के मीटिंग का आरोप लगा, बिजनोर में भी बसपा विधायक मोहम्मद गाजी पर अचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लग चुका है. इसके अलावा, जौनपुर में कांग्रेस नेता अज्जू का भाई लोगों को घड़ी बांटते हुए आचार संहिता का उलंघन करने पर गिरफ्तार हुआ है.

हालाँकि, कुछ घटनाएं पंजाब, गोवा, उत्तराखंड से भी आने लगी हैं, पर उत्तर प्रदेश में अचार संहिता की धज्जियां जिस तरह से उड़ाई जा रही हैं उससे तो साफ लगता है कि राजनीतिक दलों पर नियमों का कोई असर नहीं हो रहा है.

लेखक

जगत सिंह जगत सिंह @jagat.singh.9210

लेखक आज तक में पत्रकार हैं.

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