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Updated: 19 मई, 2017 02:26 PM
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दक्षिण के सुपरस्टार रजनीकांत ने आखिरकार बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन की बात नहीं मानी. रजनीकांत ने अपनी राय जाहिर कर दी है कि वो राजनीति को अमिताभ बच्चन की तरह गंदा नहीं मानते. प्रशंसकों से घिरे अपने 'दरबार' में रजनीकांत ने कहा कि अगर राजनीति में आते भी हैं तो कुछ शर्तें लागू रहेंगीं.

रजनीकांत ने 21 साल पहले के अपने स्टैंड को एक 'राजनीतिक दुर्घटना' माना है - और अफसोस जाहिर किया है. क्या रजनीकांत के इस 'भूल सुधार' में बीजेपी कहीं फिट हो पा रही है?

सुपरस्टार का भूल सुधार

रजनीकांत जयललिता के कट्टर आलोचक रहे हैं, लेकिन ये बात उनके शासन रहने तक ही लागू रही. जयललिता के निधन के बाद रजनीकांत उनकी शोक सभा में पहुंचे और उनसे जुड़े कई किस्से शेयर किये. शोक सभा में रजनीकांत ने कहा था, 'मैंने उन्हें चोट पहुंचाई. मैं उनकी हार की मुख्य वजह था.' 1996 में रजनीकांत ने कहा था कि अगर जयललिता की एआईएडीएमके सत्ता में लौटी तो भगवान भी तमिलनाडु को नहीं बचा सकता. माना जाता है कि ये रजनीकांत के बयान का ही असर था कि उस वक्त सत्ता विरोधी लहर में डीएमके ने जीत हासिल की - और सरकार बना ली.

rajinikanthराजनीतिक पारी के लिए तैयार सुपरस्टार

अब रजनीकांत कह रहे हैं, 'मैंने 21 साल पहले एक राजनीतिक गठबंधन का समर्थन करके एक भूल की थी. वो एक राजनीतिक हादसा था. उसके बाद से नेताओं ने कई जगह मेरे नाम का गलत इस्तेमाल किया. लेकिन मैं किसी भी पार्टी में शामिल होने नहीं जा रहा.'

रजनीकांत के इस भूल सुधार में बीजेपी तमिलनाडु अपने पांव जमाने के सपने देखने लगी है - और डीएमके के नेता और कार्यकर्ता खासे खफा बताये जा रहे हैं.

पैसा बनाने वाले कौन?

रजनीकांत के ताजा बयान को लेकर मीडिया से बातचीत में डीएमके नेताओं ने नाराजगी जताई है. डीएमके नेताओं का कहना है - तब डीएमके जीत रही थी और तमाम लोग सपोर्ट कर रहे थे और रजनीकांत भी उनमें एक थे.

राजनीति को लेकर अपनी राय जाहिर करते हुए रजनीकांत ने कहा, 'मेरे कुछ प्रशंसकों ने मुझसे राजनीति में आने की गुजारिश की है और राजनीति में आना खराब भी नहीं है, लेकिन इससे पैसा बनाना बुरा है. अगर मैं राजनीति में आने का फैसला करता हूं तो पैसा बनाने वालों से दूर रहूंगा.'

अपने बयान में रजनीकांत ने राजनीति से 'पैसा बनाने वालों से दूर रहने' पर जोर दिया है. अब सवाल ये उठता है कि रजनीकांत किसे पैसा बनाने वाला मानते हैं. पैसा बनाने से आशय तो भ्रष्टाचार और काला धन से ही हो सकता है.

रजनीकांत की इसी बात को बीजेपी खुद से जोड़ कर देखने लगी है. वैसे भी भ्रष्टाचार खत्म करने और काला धन को लेकर बीजेपी बड़ी दावेदार बन चुकी है. 15 लाख वाले जुमले को लेकर विरोधियों का हर वार बीजेपी के सामने बेकार साबित हो रहा है. यूपी चुनाव और दिल्ली एमसीडी के नतीजे इस बात के ताजा सबूत हैं. यही कारण है कि बीजेपी रजनीकांत के बयान से खुद को कनेक्ट करने की कोशिश कर रही है.

तमिलनाडु की राजनीतिक को अगर इस पैमाने पर तौलें तो सबसे पहले निशाने पर सत्ताधारी एआईएडीएमके के नेता ही नजर आते हैं. भ्रष्टाचार के मामलों में शशिकला जेल में हैं. सुप्रीम कोर्ट ने जयललिता के निधन के बाद भी अपनी टिप्पणी में उन्हें नहीं बख्शा. शशिकला के भांजे दिनाकरन भी दिल्ली पुलिस के घेरे में हैं तो मौजूदा पलानीसामी सरकार के एक मंत्री भी आयकर के.

रजनीकांत का ये मानना कि तब डीएमके का सपोर्ट उनकी भूल थी, करुणानिधि की पार्टी भी इस पैरामीटर में छंट जाती है. वैसे भी 2जी घोटालों में डीएमके नेताओं के खिलाफ कोर्ट में केस चल रहा है.

एआईएडीएमके और डीएमके के अलावा भी तमिलनाडु में कई छोटी छोटी पार्टियां हैं जिनमें से कुछ को तो जयललिता ने अपने सिंबल पर चुनाव लड़ाया था. पिछले विधानसभा चुनाव में इन पार्टियों को लेकर भी मोर्चेबंदी की कोशिशें हुईं लेकिन नतीजा सिफर ही रहा.

अब बचते हैं कांग्रेस और बीजेपी. थोड़ा बहुत बिहार में और पंजाब को छोड़ कर देश के तमाम राज्यों में आउट होती जा रही कांग्रेस तमिलनाडु में कोई चमत्कार दिखा पाएगी, फिलहाल तो बात करना भी बेमानी होगी.

तीन महीने पहले की बात है. इस साल फरवरी में ही रजनीकांत के राजनीति में आने की संभावना जताई गई थी. खबरों में ये भी था कि अगर रजनीकांत कोई पार्टी बनाते हैं तो बीजेपी हाथ मिला सकती है. बताया ये भी गया था कि आरएसएस और बीजेपी नेताओं ने ही रजनीकांत को इसकी सलाह दी थी. इसमें एस गुरुमूर्ति की प्रमुख भूमिका भी सामने आयी थी.

रजनीकांत ने अपनी राजनीतिक पारी का संकेत देते हुए एक और अहम बात कही है - वो किसी पार्टी में नहीं जा रहे. यानी वो नई पार्टी भी बना सकते हैं. हो सकता है वो किसी नये राजनीतिक फोरम का हिस्सा बन जाएं जिसकी अंदर ही अंदर तैयारी चल रही हो. वैसे रजनीकांत जो भी फैसला लें, बीजेपी उसमें कहीं भी फिट होती है तो उसके दोनों हाथों में लड्डू है - अगर कोई नया फोरम बनता है तो साझीदार बन सकती है, नहीं तो रजनीकांत को पोस्टरबॉय का खुला ऑफर तो है ही.

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