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सियासत

 |  5-मिनट में पढ़ें  |   29-11-2016

जम्मू एवं कश्मीर के नगरोटा और चमलियाल में आतंकवादियों ने हमला कर दिया है. नगरोटा में सेना की एक टुकड़ी पर हमला हुआ तो वहीं चमलियाल में बीएसएफ के काफिले पर हमला किया गया. नगरोटा में यह हमला सुबह 5:30 बजे हुआ और उसके कुछ ही देर बाद चमलियाल में आतंकी हमला हुआ. फिदायीन हमले में सेना के 2 जवान शहीद हो गए हैं. सेना की 16वीं कोर के मुख्यालय के पास नगरोटा में फील्ड रेजिमेंट शिविर स्थित है.

उधर, जम्मू-कश्मीर के साम्बा सेक्टर में अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास घुसपैठ कर रहे चरमपंथियों के समूह एवं बीएसएफ के जवानों के बीच मुठभेड़ की भी खबरें हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार आतंकी अत्याधुनिक हथियारों से लैस हैं. सुरक्षाबलों ने इलाके को घेर लिया है और ऑपरेशन जारी है. सेना और आतंकियों के बीच लगातार दूसरे दिन मुठभेड़ हुई है. सोमवार को भी सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच हंदवाड़ा के लांगेट क्षेत्र में मुठभेड़ हुई थी.

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 फिदायीन हमले में सेना के 2 जवान शहीद हो गए हैं

अब तक भारत-पाकिस्तान के बीच मधुर संबंध स्थापित करने को लेकर हुए सारे प्रयास निर्थक साबित हुए हैं. भारत में पाकिस्तानी आतंकवाद उसी का प्रतिफल है. चाहे वह 1965 का हमला हो या 1971 का युद्ध, या फिर कारगिल युद्ध. सब में उसका दोहरा चरित्र ही उजागर हुआ है. यह भी कहा जा रहा है की पाकिस्तान में ऐसे आतंकी संगठन है, जिन्हें दोनों देशों के बीच शांति का प्रयास बिल्कुल पसंद नहीं है. इन संगठनों और पाकिस्तानी सरकार में मतभेद शांति के रास्ते में रोड़ा बनते हुए आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है.

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पाकिस्तान भले ही भारतीय सेना सर्जिकल ओपरेशन की आलोचना कर रहा हो लेकिन आंकड़ों पर नज़र डालें तो साल 2002 से जून 2016 तक पाकिस्तान की तरफ से करीब 11,270 बार सीजफायर उल्लंघन किया गया है. पाकिस्तान के साल 2002 से जून 2016 तक किए गए सीजफायर उल्लंघन की घटनाओं में करीब 313 भारतीय नागरिक मारे गए हैं जबकि 144 सेना के जवान शहीद हुए हैं. सबसे ज्यादा बार सीजफायर उल्लंघन साल 2002 में ही देखने को मिला था. तब LOC पर ऐसी 8376 घटनाएं देखने को मिली थीं. 2003 में ये आंकड़ा घटकर 2045 रह गया था.

साऊथ एशियन टेरेरिज्म पोर्टल के मुताबिक पाकिस्तान समर्थित आतंकी घटनाओं और घुसपैठ की घटनाओं में इस साल 20 नवम्बर 2016 तक हुए हमलों में 50 भारतीय सैनिक शहीद हो चुके हैं, जबकि 95 आतंकवादी मरे जा चुके हैं, ये पिछले 6 सालों में सबसे ज्यादा है. इससे पहले साल 2010 में 69 जवान मारे गए थे.आंकड़ों पर नज़र डालें तो मोदी सरकार के आने के बाद से सीमा घुसपैठ की घटनाओं में कमी देखी जा रही थी लेकिन साल 2016 में पाकिस्तानी सेना के सपोर्ट में ये गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं. इसी के चलते भारतीय सैनिकों के शहीद होने की संख्या भी तेजी से बढ़ी है.

जम्मू एवं कश्मीर में सैन्य ठिकाने पर हुए भीषण आतंकी हमले ने जहां पाकिस्तान के ‘दोगले चरित्र’ को एक बार फिर उजागर किया है, इसी साल 2 जनवरी को पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमले के साढ़े आठ माह के अंतराल पर 18 सितंबर को जम्मू-कश्मीर के उरी सैन्य ठिकाने पर हुए इस हमले के बाद पूरा भारत एक मत से इन आतंकवादी घटनाओं की घोर निंदा कर रहI है . पठानकोट में 7 और उरी हमले इन 19 भारतीय जवान शहीद हो गए थे. अभी पिछले दिनों 22 नवम्बर को संदिग्ध पाकिस्तानी आतंकियों द्वारा नियंत्रण रेखा के पार से किए गए हमले में तीन भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे. इनमें से एक के शव को क्षत-विक्षत कर दिया गया था. इसके बाद भारतीय सेना ने उत्तरी कश्मीर में नियंत्रण रेखा पर भीषण जवाबी कार्रवाई की.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने लेफ्टिनेंट जनरल कमर जावेद बाजवा को नया सेनाध्यक्ष नियुक्त किया है. कश्मीर में सैन्य संचालन से जुड़े रहे बाजवा जनरल राहील शरीफ की जगह लेंगे, जो 29 नवंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं. और आज के ही दिन जनरल बाजवा, पाकिस्तान सेना की कमान संभालेंगे. सेना की प्रशिक्षण और मूल्यांकन शाखा के आईजी बाजवा तीन अन्य दावेदारों को पछाड़ते हुए सेना प्रमुख बने. बाजवा के पास कश्मीर और गिलगिट-बाल्टिस्तान के सैन्य मामलों के संचालन का गहरा अनुभव है.  बाजवा ने काफी वक्त सेना की रावलपिंडी स्थित 10वीं टुकड़ी की कमान संभाली. इस टुकड़ी के पास नियंत्रण रेखा की रक्षा करने की जिम्मेदारी है. देखना होगा कि  आतंकी संगठनों पर कार्रवाई को लेकर सरकार और सेना के बीच समन्वय में बाजवा कैसी भूमिका निभा सकते हैं. भारत के धुर विरोधी राहील शरीफ के कार्यकाल में सीमा पर गोलीबारी, घुसपैठ और आतंकी हमलों को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा है.

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आतंकवादियों ने विगत कुछ दिनों के शांति के बाद लाइन ऑफ कण्ट्रोल पर फिर आज फिर दहशतगर्दी दिखाई है, तो क्या ये माना जाए कि पाकिस्तान के नए आर्मी चीफ बाजवा के ताजपोशी पर पाकिस्तानी आतंकवादियों के ओर से दी गयी सलामी है.

तो क्या पाकिस्तान की आक्रामकता और एक भारतीय जवान के शव के साथ बर्बरता और भारत के द्वारा किये गए सर्जिकल हमलों का श्रेय लेने वाली सरकार को अब सीमा पर मौतों को रोक पाने में अपनी असफलता स्वीकार करनी चाहिए,  या फिर भारत को जवाबी कार्यवाही सर्जिकल स्ट्राइक के द्वारा पाकिस्तान के नापाक हरकतों का करार जवाब देकर LOC पर शांति बहाल करने को मजबूर करना पड़ेगा.

लेखक

जगत सिंह जगत सिंह @jagat.singh.9210

लेखक आज तक में पत्रकार हैं.

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