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Updated: 24 अप्रिल, 2017 07:41 PM
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रविवार को खत्म हुए नगरपालिका चुनावों के एक्जिट पोल ने भविष्यवाणी की है कि भाजपा दिल्ली के तीन नगरपालिका में अपना कब्जा बनाए रखेगी. एमसीडी चुनावों के नतीजों को अरविंद केजरीवाल सरकार के दो साल के कामकाज के लिए एक जनमत संग्रह के रूप देखा जा रहा है. रविवार को संपन्न हुए एमसीडी चुनावों के 270 वार्डों के वोटों की गिनती 26 अप्रैल को होगी.

इस साल दिल्ली की नगरपालिका चुनावों के लिए लोगों की उत्सुकता विधानसभा चुनावों से कम नहीं है. जानिए वो पांच चीजें जिनके कारण इस बार के एमसीडी चुनाव में लोगों को इतनी रूचि जगी है:

1- भाजपा की लहर यहां भी चलने का अनुमान है

नगरनिगम चुनाव, दिल्लीइज्जत दांव पर है

एक्जिट पोल ने एक बार फिर बीजेपी की बड़ी जीत की भविष्यवाणी की है. इंडिया टुडे ने अपने एक्जिट पोल में उत्तर और दक्षिण निगमों में पार्टी को 80-80 सीटें और पूर्वी निगम में 50 सीटें दी हैं. वहीं दिल्ली सरकार का कमान संभालने वाली आम आदमी पार्टी को तीनों ही निगमों में दूसरे स्थान रखा गया है. हालांकि आम आदमी पार्टी फिर कांग्रेस से बाजी मार ले जा रही है.

वहीं एबीपी न्यूज ने भी भाजपा के लिए एक बड़ी जीत की भविष्यवाणी की है. इनके एक्जिट पोल में भी आम आदमी पार्टी को दूसरे स्थान पर बताया जा रहा है. ये भाजपा को उत्तर में कुल 104 सीटों में से 88 सीटें दे रही है. दक्षिण के कुल 104 सीटों में से 83 और पूर्व में 64 में से 47 सीटें आने का अनुमान दे रही है. कुल मिलाकर भाजपा को 218, आप को 24 और कांग्रेस 22 सीटें मिलने का दावा किया जा रहा है.

2- गिलास आधा भरा है?

दिल्ली के लगभग आधे मतदाता मतदान से दूर रहे. शहर में कुल 53.6% का ही मतदान हुआ. 1997 के बाद से रविवार को हुआ ये निगम चुनाव सबसे ज्यादा वोटर टर्नआउट वाला चुनाव रहा. 2012 में 53.23% मतदाताओं ने अपना वोट डाला था. तीनों निगमों में पड़े वोटों की बात करें तो, पूर्व में 55% के साथ सबसे ज्यादा वोटिंग दर्ज की गई. इसके बाद उत्तर में 54% और दक्षिण के 50% वोट पड़े.

3- नाक का सवाल है

नगरनिगम चुनाव, दिल्लीहार किसी को बर्दाश्त नहीं

एमसीडी चुनाव अब नगर निगम के नगर पार्षदों को चुनने भर का चुनाव नहीं रह गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर निकाय चुनावों में भाजपा का वोट मांगना बताता है कि किस तरह ये चुनाव इनके लिए नाक का सवाल बन गया है.

अगर एक्ज़िट पोल के परिणाम सही होते हैं तो बीजेपी के लिए ऐसी संजीवनी का काम करेगा जिसके बाद ये ना सिर्फ आम आदमी पार्टी पर हमला कर सकेंगे बल्कि विधानसभा चुनावों में मिली करार के अपमान को भी पीछे छोड़ने में भी मदद मिलेगी.

कांग्रेस के लिए ये चुनाव जहां वापसी करने का एक शानदार मौका लेकर आई है वहीं आम आदमी पार्टी के लिए इस चुनाव में हार अपने सरकार और काम-काज के प्रति जनता की नाराजगी का प्रतीक होगी. आप के लिए कार्यकाल के बीच में इस चुनाव को हारना एक बड़ा धक्का साबित होगा.

4- ईवीएम समस्या

नगरनिगम चुनाव, दिल्लीऊंट किस करवट बैठेगा

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मतदान के दिन भी ईवीएम विरोधी अभियान की मशाल को जलाए रखा. उन्होंने राज्य के चुनाव आयोग पर शहर के कुछ हिस्सों में मशीनों की खराब होने की रिपोर्टों पर सवाल उठाया.

चुनाव आयोग ने कहा कि यह ईवीएम खराब होने की 18 शिकायतें आई है. ये कोई बहुत बड़ी संख्या नहीं है और इस तुरंत हटा भी दिया गया था. राज्य के चुनाव आयुक्त एस के श्रीवास्तव ने कहा कि- '18 शिकायतों में से 5 उत्तरी दिल्ली से, दक्षिण से आठ और पूर्व में पांच शिकायतें मिली थी.'

5- लोग क्या चाहते हैं

दिल्ली के निवासियों को बहुत अधिक उम्मीदें नहीं हैं. नागरिक निकायों से वो बस इतना ही चाहते हैं कि उनके मूलभूत समस्याओं का निदान कर दिया जाए. लोगों के लिए स्वच्छता एक बड़ी चिंता है और कचरा जमा करने की समस्या तो मानो खत्म होने का नाम ही नहीं लेती. डस्टबिन का अभाव, सड़कों की अनियमित सफाई और कचरे की डंपिंग ऐसी कुछ मूलभूत समस्याएं यहां के मतदाताओं की है. साथ ही सड़कों की खास्ता हालत से भी नागरिक खासे परेशान हैं.

शहर लगातार बढ़ रही डेंगू और चिकनगुनिया की समस्या के कारण निवासियों में चिंता है. इसके लिए नागरिक निगम के अधिकारियों को मच्छर प्रजनन की सही समय पर जांच और उसका निदान नहीं करने का दोषी ठहराते हैं. मतदाताओं की एक समस्या शहर में पर्याप्त पार्किंग सुविधाएं ना होना भी हैं.

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