सियासत

 |  3-मिनट में पढ़ें  |   03-01-2017

उत्तर प्रदेश में सत्ता पर कब्जा जमाना इस बार बीजेपी की चाहत ही नहीं मजबूरी भी है, वो इसलिए क्योंकि राज्य के चुनाव के ठीक बाद यानि इस साल के अंत में जहां चुनाव होने हैं वो राज्य खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का करीबी रहा गुजरात है. उत्तर प्रदेश में बीजेपी का प्रदर्शन जाहिर है बाकी राज्यों पर भी असर डालेगा. दूसरी बात ये है कि इस वक़्त राज्य में पार्टी सालों बाद अब तक की सबसे बेहतर स्थति में चुनाव लड़ रही है. सबसे ज्यादा सांसद उसके हैं और बैठे बैठाए बिखरे हुए विपक्ष ने उसकी जमीन काफी हद तक साफ की है.

इस सबके मद्देनज़र पार्टी ने अपने प्रचार का नया खाका तैयार किया है. दिलचस्प ये है कि 50 दिन तक नोटबंदी के जनता पर हुए असर को भांपने के बाद अब बीजेपी की रणनीति नोटबंदी से हटकर राज्य में लोकल मुद्दों पर जनता से जुड़ने की है.

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नए पोस्टरों और होर्डिंग में नोटबंदी नहीं लोकल मुद्दों पर फोकस

अब पूरे उत्तर प्रदेश में जगह जगह बीजेपी के ये पोस्टर ही दिखाई देंगे जिनमें किसान, महिला, कानून व्यवस्था, बेरोज़गारी और पलायन जैसे मुद्दे होंगे. इन सबसे निजाद दिलाकर परिवर्तन लाने का वादा पार्टी करेगी.

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बिना चेहरे के सिर्फ मुद्दों से होगा हमला

पार्टी की तरफ से ये संकेत साफ हैं कि चुनाव से पहले मुख्यमंत्री का कोई चेहरा सामने नहीं लाया जाएगा. सिर्फ मोदी के चेहरे को आगे रखकर पार्टी मैदान में कूदेगी. चुनाव से ऐन पहले प्रचार की नई रणनीति भी इसी के इर्द गिर्द घूमेगी जिसमे किसी राष्ट्रीय या लोकल नेता का चेहरा दिखाई नहीं देगा. सिर्फ मुद्दों के आधार पर विरोधियों पर वार किया जायेगा.

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किसान महा अभियान जोड़ेगा किसानों से

नोटबंदी के बाद विपक्ष ने किसानों के मुद्दे पर हमला तेज किया जिससे निबटने के लिए पार्टी ने किसानों से सीधे संवाद का कार्यक्रम बनाया है. दो चरणों में पार्टी के नेता किसानों से मिलेगें. पहले चरण में लगभग 400 गांव में जाकर "अलाव सभाएं" होंगी और दूसरे चरण में ज़िला स्तर पर "माटी तिलक प्रतिज्ञा " अभियान चलेगा. इन सभाओं में नेता किसानों को नोटबंदी के सकारात्मक प्रभाव बताएंगे, साथ ही केंद्र सरकार की किसानों के लिए बनी योजनाओं का ब्यौरा सामने रखेंगे. किसानों को बताया जायेगा कि किस तरह बसपा सपा और कांग्रेस ने उन्हें धोखा दिया और मोदी सरकार ने उन्हें फायदा पहुचाया.

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समय के साथ चलने के लिए डिजिटल होना जरूरी

राज्य में प्रधानमंत्री की लगभग हर रैली में डिजिटल पेमेंट का नारा बुलंद होगा. इसके लिए बाकायदा केंद्रीय मंत्री शहरों और ज़िलों में जाकर डिजिटल सिस्टम सिखाने के लिए चल रही ट्रेनिंग का हिस्सा बनेंगे और लोगों को ये बताने पर ज़ोर होगा की भविष्य में दुनिया के साथ चलने के लिए नोटबंदी का कदम कितना जरूरी था.

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प्रधानमंत्री के 31 दिसम्बर के सन्देश को घर घर पहुंचाया जाए

मोदी की किसानों, महिलाओं, छोटे व्यापारियों और बुजुर्गों के लिए की गई घोषणाएं पार्टी के प्रचार का अहम हिस्सा बनेंगी. इन्हें केंद्र में रखकर विरोधियों पर हमला किया जायेगा.

लेकिन इन सबके बीच पार्टी ने कार्यकर्ताओं को ये हिदायत दे दी है कि साम दाम दंड भेद एक करके यूपी का किला फतह करना इस बार उसकी आन का सवाल है इसलिए ऐसी कोई चूक ना छोड़ी जाए जिससे गेम उसके हाथ से निकले.

लेखक

रीमा पाराशर रीमा पाराशर @reema.parashar.315

लेखिका आज तक में पत्रकार हैं.

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