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Updated: 19 अप्रिल, 2017 02:04 PM
रिम्मी कुमारी
रिम्मी कुमारी
  @sharma.rimmi
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25 साल पुराने बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा फैसला सुनाया जो भाजपा के कई बड़े नेताओं के पैरों तले से जमीन खींच लेने के लिए काफी है. सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रपति पद की दौड़ के फ्रंट रनर माने जाने वाले लालकृष्ण आडवाणी को करारा झटका दिया है. यही नहीं कोर्ट ने मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती समेत 13 लोगों के खिलाफ आपराधिक साजिश का मुकदमा चलाने का आदेश दिया है.

बाबरी मस्जिद, लालकृष्ण आडवाणी, उमा भारती, सुप्रीम कोर्टरथयात्रा पूरी करके आडवाणी जब अयोध्‍या पहुंचे थे तब यह तस्‍वीर इंडियन एक्‍सप्रेस के लिए आर के शर्मा ने खींची थी. कारसेवा से कुछ समय पहले.

सुप्रीम कोर्ट का फैसला आते ही ट्विटर भी 'बाबरीमय' हो गया. लोग धड़ाधड़ ट्वीट कर फैसले पर अपनी टिप्पणी दे रहे हैं. वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने ट्वीट किया है कि- 'बाबरी मस्जिद को 1992 में गिराया गया. 1000 से ज्यादा लोग इस घटना में मारे गए और 25 साल बाद सुप्रीम कोर्ट कहता है कि लोअर कोर्ट में मामला शुरू हो. जो लोग आरोपी हैं, वो अभी सत्ता में हैं!'

वहीं वरिष्ठ पत्रकार बरखा दत्त ट्वीट करती हैं- 'कोर्ट के बाबरी केस पर आदेश के बाद आडवाणी के राष्ट्रपति पद के लिए खतरा, कल्याण सिंह को गवर्नर के पद से इस्तीफा देना पड़ सकता है और उमा भारती पर कैबिनेट का पद छोड़ने का दबाव बनेगा?'

बाबरी मस्जिद पर कोर्ट के इस आदेश के बाद लोग कश्मीर में मंदिरों के विनाश की बात को भी उठा रहे हैं. तो कुछ लोग आडवाणी जी के बुरे दौर का मजा भी ले रहे हैं. पढ़ें लोगों के ट्विट -

तहसीन पुनावाला ने लिखा है- 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ये सुनिश्चित किया कि आडवाणी जी राष्ट्रपति ना बन पाएं और भाजपा को लोगों की सांत्वना भी मिले.'

ऋषि बागरी नाम के ट्विटर यूजर ने लिखा है कि 'कश्मीर से लेकर नक्सल तक का हर मुद्दा हमारे यहां राजनीतिक हस्तक्षेप से सुलझाया जाता है बस बाबरी मस्जिद का मुद्दा कोर्ट सुलझाएगा.'

कोर्ट ने फैसला दिया है कि 2 साल तक रोजाना इस मुद्दे की सुनवाई होगी और इस बीच सुनवाई करने वाले किसी भी जज का तबादला नहीं किया जा सकेगा. कोर्ट को वैसे तो हमारे यहां निष्पक्ष माना जाता है लेकिन कई लोग इस फैसले के बाद कोर्ट पर भी उंगलियां उठा रहे हैं. खैर मामला चाहे जो भी हो, लगता है कि आडवाणी जी के अच्छे दिन अब आने से रहे. शायद वो यही सोच रहे होंगे- हजारों ख्वाहिशें ऐसी की हर ख्वाहिश पर दम निकले, बहुत निकले मेरे अरमां लेकिन फिर भी कम निकले.

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लेखक

रिम्मी कुमारी रिम्मी कुमारी @sharma.rimmi

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं.

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