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 |  3-मिनट में पढ़ें  |   15-07-2017
श्रुति दीक्षित
श्रुति दीक्षित
  @shruti.dixit.31
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सिर्फ एक सीधा सा सवाल है... ऐसा कितनी बार हुआ है कि आपने किसी साल इनकम टैक्स रिटर्न बिना किसी झंझट के भर दिया हो? अगर पिछले साल ऐसा हुआ भी हो तो भी इस साल नियमों में कुछ बदलाव हो गए हैं और हो सकता है कि ये नियम आपके लिए किसी ना किसी तरह से फायदेमंद ही साबित हों. दरअसल, भारत सरकार ने 2017-18 के इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के नियमों में थोड़ा सा बदलाव किया है. तो चलिए जानते हैं कौन से हैं वो नियम...

1. सबसे पहला नियम तो यही है कि आपको अब इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के लिए आधार कार्ड को पैन कार्ड से लिंक करवाना होगा.

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2. दूसरा जो बदलाव किया गया है वो ये कि इनकम टैक्स रिटर्न भरने के लिए अब 5 लाख से कम सालाना आय वालों को सिर्फ एक पेज का ITR (इनकम टैक्स रिटर्न) फॉर्म भरना होगा. इसके पहले ये काफी कॉम्प्लेक्स फॉर्म हुआ करता था.

3. वो लोग जिन्हें 50 लाख तक सैलरी किसी इनकम में मिल रही है, 1 घर है और बैंक डिपॉजिट है उनके लिए ITR1 फॉर्म है और इसके अलावा, वो लोग जो सैलरी नहीं बल्कि किसी अन्य तरीके से इनकम ले रहे हैं और बिजनेस नहीं कर रहे. जैसे स्टॉक मार्केट इन्वेस्टर, फ्री लैंसर, रियल एस्टेट आदि से मिला है तो आपको ITR2 फॉर्म भरना होगा.

4. अब ITR फॉर्म्स की संख्या कम हो गई है. पहले ये 9 हुआ करते थे और अब 7 फॉर्म ही भरने होंगे. पिछले  ITR-2, ITR-2A, और ITR-3 फॉर्म्स को रिप्लेस कर अब सिर्फ ITR2 फॉर्म कर दिया गया है. पिछला ITR4 फॉर्म का नाम बदलकर ITR3 कर दिया गया है.

5. ITR फॉर्म्स में दो नए सेक्शन लाए गए हैं. इनमें से एक है सेक्शन 10(38) जहां आपको लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स के बारे में बताना है और एक है सेक्शन 10(34) जहां आपको भारतीय कंपनियों के डिविडेंट्स की जानकारी देनी है जिन्हें आपको इनकम टैक्स से दायरे से बाहर रखना है.

6. अब इस बात को थोड़ा और ध्यान से सुन लीजिए कि अगर आप इनकम टैक्स डिडक्शन फाइल कर रहे हैं तो अब 80C, 80D, 80G और 80TTA के अलावा बाकी सभी सेक्शन एक ही सिंगल विंडो के अंदर कर दिए गए हैं. यानी अगर आपने इसमें से कुछ मिस किया तो आपको नुकसान हो सकता है.

आपको बता दूं कि इस साल नोटबंदी के बाद अनैतिक तौर पर जिनके भी अकाउंट में पैसा जमा हुआ है उनमें से 5.56 लाख लोगों की पहचान कर ली गई है. ये इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के ऑपरेशन क्लीन मनी के फेज 2 के दौरान हुआ है. ये ऐसे लोग हैं जिनके कैश डिपॉजिट का डेटा उनके टैक्स प्रोफाइल से मेल नहीं खाता है. इसके अलावा भी 1.04 लाख लोग पहले पहचाने जा चुके हैं.

सरकार इस बात का ध्यान रख रही है कि टैक्स चोरी और कालेधन वालों पर शिकंजा कसा जा सके. हालांकि, ये कितना सफल हुआ है इसपर संशय है, लेकिन फिर भी कोशिशों को कम नहीं कहा जा सकता.   

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श्रुति दीक्षित श्रुति दीक्षित @shruti.dixit.31

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं.

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